31 Aug 2020

प्रिज़र्वटिव या परिरक्षक

प्रिज़र्वटिव या परिरक्षक क्या है?

प्रिज़र्वटिव या परिरक्षक एक ऐसा पदार्थ या रसायन है जो खाद्य या पेय पदार्थ, प्रसाधन सामग्री, दवाइयों आदि में मिलाया जाता है, ताकि उन्हें ख़राब होने या सड़ने से बचाया जा सके।

यह इन उत्पादों के शेल्फ़ लाइफ को बढ़ाता है और उनके अपव्यय को कम करता है। इस लेख में, हम केवल खाद्य प्रिज़र्वटिव और हमारे स्वास्थ्य पर उनके प्रभावों के बारे में चर्चा करेंगे।

प्रिज़र्वटिव निम्नलिखित तरीकों से खाद्य उत्पादों को ख़राब होने या सड़ने से बचाते हैं: –

१. ऐंटीमाइक्रोबियल ऐक्शन अर्थात विषाणु विरोधी कार्य :
जब खाना लम्बे समय तक रखा जाता है, तब उसमें सूक्ष्मजीव जैसे बैक्टीरिया, fungus (कवक) आदि के जमने के कारण वह सड़ने लगता है, प्रिज़र्वटिव इन सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर देते हैं या कम से कम उनके विकास में देरी करते हैं, इस तरह से खाद्य पदार्थों को तेजी से खराब होने/सडने से बचाते हैं।

२. एंटी-ऑक्सीडेंट ऐक्शन: खाना जब हवा और ऑक्सीजन के संपर्क में आता है तब खाने के अंतर्गत वसा और तेलों के टूटने को तेज करता है और उन्हें बासी बनाता है। ऐंटी-ऑक्सीडेंट कार्य के माध्यम से, संरक्षक या तो वसा और तेल के ऑक्सीडेशन को रोकते हैं या धीमा करते हैं और उन्हें बासी होने से बचाते हैं।

३. ऐंटी-एंजाइमी ऐक्शन या कार्य : भोजन के भीतर लगातार कई एंजाइमी या जैविक उत्प्रेरक प्रक्रियाएं होती हैं, उदा: फलों, सब्जियों का पकना, रंग और स्वाद में बदलाव, सड़न, आदि। कुछ प्रिज़र्वटिव भोजन में होने वाली इन एंजाइमी प्रक्रियाओं को अवरुद्ध करते हैं। इस प्रकार भोजन की एक स्थिति से दूसरी में परिवर्तन में देर करते हैं या इसे खराब होने से रोकते हैं।

प्रिज़र्वटिव कितने प्रकार में पाए जाते हैं?

प्रिज़र्वटिव को आम तौर पर दो मुख्य वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है:-

१. प्राकृतिक प्रिज़र्वटिव:
ये स्वाभाविक रूप के खाद्य पदार्थ होते हैं। इनकी संरचना को बदलने के लिए इनमें मिलाया हुआ रसायन या सिंथेटिक पदार्थ नहीं होता और ये मूल स्थिति में उपयोग में लाए जाते है। ये ऐंटी-ऑक्सीडेंट कार्य द्वारा खाद्य को खराब होने से बचाते हैं।

२. कृत्रिम प्रिज़र्वटिव:
ये कृत्रिम रूप से निर्मित रासायनिक प्रिज़र्वटिव हैं। खाने के पैकेट्स के लेबल पर, इन्हें ‘खाद्य योगज‘ के रूप में उल्लिखित किया जाता है। कृत्रिम प्रिज़र्वटिव सामान्यतया जैम, जेली, सॉस और मसालों, सलाद ड्रेसिंग, आदि खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं।

वे ऐंटीमाइक्रोबियल, ऐंटी-एंजाइमी और ऐंटी-ऑक्सीडेंट गुणधर्म आदि जैसे विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से खाद्य को खराब होने से रोकते हैं। आदर्शरूप में, एक खाद्य पदार्थ में एक से अधिक कृत्रिम प्रिज़र्वटिव नहीं होना चाहिए।

क्या प्रिज़र्वटिव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं?

प्रिज़र्वटिव का उपयोग करने का प्राथमिक उद्देश्य शीघ्र अपघटन से खाद्य को बचाना और इसके शेल्फ लाइफ (भंडार और उपयोग की अवधि) को बढ़ाना है। चीनी, नमक, सिट्रिक ऐसिड, आदि जैसे प्राकृतिक संरक्षक उपयोग के लिए सुरक्षित हैं। ये ऐसे सामान्य खाद्य पदार्थ हैं जिनका हम आम तौर पर उपयोग करते हैं। यह ध्यान में रखना चाहिए कि, हालांकि प्राकृतिक संरक्षक सुरक्षित हैं, हमें इनके उपयोग को सीमित रखना चाहिए। अधिक मात्रा में सेवन किए जाने पर वे हानिकारक हो सकते हैं क्योंकि, वे (चीनी, नमक, तेल) उच्च रक्तदाब, मधुमेह, मोटापे, आदि के जोखिम को बढ़ाते हैं।

कृत्रिम प्रिज़र्वटिव रासायनिक पदार्थ हैं। वे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ न होने के कारण उनका अधिक सेवन करना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। ये हमें विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं और बीमारियों से ग्रस्त कर सकते हैं जैसे कि:-

• आंत, अग्न्याशय, पेट, आदि के कैंसर होने का जोखिम बढ़ जाता है।
• अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियों का जोखिम बढ़ता है।
• नई एलर्जी शुरू होने या मौजूदा एलर्जी अधिक बिगडने लगती है।
• हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाता है और हृदय की कार्यक्षमता को कमजोर करता है। (हार्ट फेल होने का जोखिम बढ़ जाता है।
• धमनियों को कठोर बना सकता है, जिससे सीने में दर्द और दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ता है।
• पेट में जलन (अक्सर पेट दर्द, दस्त, अपचन)।
• जोड़ों में दर्द और सूजन।
• त्वचा में जलन, रूखापन और एलर्जी, आदि।
• पुरुषों और महिलाओं दोनों में अनुपजाऊता (इन्फर्टिलिटी) तथा पी.सी.ओ.एस (पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम) महिलाओं में बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है।
• मोटापा और अतिरिक्त वजन की बढोतरी।
• टाइप -2 डायबिटीज मेलिटस होने का जोखिम।
• सहायक (अच्छे) आंत बैक्टीरिया की संख्या में कमी होना।
• प्रतिरक्षा में कमी से बार-बार संक्रमण होना।
• प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्यता या अधिकता (स्व-प्रतिरक्षित रोग)।
• तंत्रिका तंत्र को नुकसान (अल्जाइमर और मनोभ्रंश की बढ़ती घटना)।
• थायरॉइड प्रणाली की समस्याएं। या तो हाइपोथायरॉइडिज्म (अंडरऐक्टिव थायरॉइड) या हाइपरथायरॉइडिज्म (ओवरऐक्टिव थायरॉइड) ।

ज़हरीलेपन को कैसे रोकें?
• जहां तक ​​संभव हो सके, घर पर ताजा खाना बनाने और खाने की कोशिश करें। घर में पकाए जानेवाले ताज़े भोजन में कोई कृत्रिम प्रिज़र्वटिव नहीं होते। नमक और चीनी जैसे प्राकृतिक प्रिज़र्वटिव की मात्रा को आसानी से जरुरतनुसार अनुकूलित किया जा सकता है।
• बाहर का खाना खाने की मात्रा और आवृत्ति कम करें।
• अपने नियमित आहार में प्रोसेस्ड फूड, डिब्बाबंद भोजन और पेय पदार्थों की मात्रा न्यूनतम रखें।
• जहां तक ​​संभव हो फ्रोज़न (ठंड़ा) खाना (फल, सब्जियां, मांस, मछली, आदि) खरीदने से बचें।
• अपने नियमित आहार में ताजा सब्जियां, फल, अनाज, फलियां, ताजा चिकन (प्रोसेस्ड या कोल्ड स्टोरेजवाला नहीं), अंडे, ताजा दूध, दही, पनीर आदि शामिल करें।
• यदि संभव हो तो आर्गेनिक खाद्य (फल और सब्जियां) खरीदने की कोशिश करें। इन पदार्थों में प्रिज़र्वटिव अल्प मात्रा में या ना के बराबर होते हैं|
• प्रिज़र्वटिव की पहचान के लिए किसी भी पैक किए गए भोजन को खरीदते समय सामग्री के लेबल को पढ़ने की आदत डालें। (आम तौर पर सामग्री सूची के अंत में उल्लेख किया गया होता है)।
• हो सके तो, घर पर ब्रेड, केक, कुकीज बेक करने की कोशिश करें।
• नमक, चीनी, सिट्रिक ऐसिड आदि के अलावा किसी भी प्रिज़र्वटिव के बिना घर पर सॉस, चटनियां बनाने की कोशिश करें।
• फलों और सब्जियों को 20 मिनट के लिए नमक और हल्दी वाले गुनगुने पानी में भिगोएँ और फिर बनाने से पहले अच्छी तरह से धो लें। यह उनकी सतह से कीटनाशकों के अवशेषों को हटा देता है।

REFERENCES:

https://en.wikipedia.org/wiki/Preservative#:~:text=Natural%20preservatives%20include%20rosemary%20and,diatomaceous%20earth%20and%20castor%20oil.
https://ijpsr.com/bft-article/artificial-preservatives-and-their-harmful-effects-looking-toward-nature-for-safer-alternatives/?view=fulltext
https://www.nature.com/news/food-preservatives-linked-to-obesity-and-gut-disease-1.16984
https://www.researchgate.net/publication/277714512_EFFECTS_OF_FOOD_ADDITIVES_AND_PRESERVATIVES_ON_MAN-A_REVIEW
https://www.health.harvard.edu/blog/common-food-additives-and-chemicals-harmful-to-children-2018072414326
https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6538975

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